जिलाधिकारी के अतिक्रमण विरोधी अभियान के बीच ज्वालापुर क्षेत्र में फिर उभरा सरकारी जमीन कब्जाने का मामला

हरिद्वार। ज्वालापुर राजस्व क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ज्वालापुर बहादराबाद सीमा में स्थित खसरा नंबर 649, जो राजस्व अभिलेखों में नदी की भूमि के रूप में दर्ज है, एक बार फिर विवादों में आ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भू-माफिया दोबारा इस सरकारी भूमि पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे न केवल प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि सरकारी भूमि संरक्षण के दावों की भी पोल खुलती दिखाई दे रही है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 में तत्कालीन उप जिलाधिकारी अजयवीर सिंह और तहसीलदार प्रियंका रानी के नेतृत्व में इस भूमि पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने की बड़ी कार्रवाई की गई थी। मौके पर जेसीबी चलाकर अवैध निर्माण और प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया था। साथ ही भूमि को सरकारी संपत्ति घोषित करते हुए चेतावनी बोर्ड भी लगाया गया था। संबंधित भू-माफियाओं के खिलाफ हल्का लेखपाल की ओर से मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।

प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान पाया गया था कि नदी की भूमि पर कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से प्लॉटिंग की जा रही थी। कार्रवाई के बाद चेतावनी बोर्ड स्थापित किया गया, लेकिन आरोप है कि बाद में उसे भी हटा दिया गया। इतना ही नहीं, सरकारी भूमि पर विद्युत पोल और अन्य सुविधाएं स्थापित कर कब्जे को मजबूत करने की कोशिशें भी सामने आई थीं।
अब एक बार फिर उसी भूमि पर कब्जे की गतिविधियों की चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजस्व विभाग की नियमित निगरानी नहीं होने के कारण भू-माफिया फिर सक्रिय हो गए हैं। आरोप है कि धीरे-धीरे सरकारी भूमि पर दोबारा कब्जे का खेल शुरू कर दिया गया है।
यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब जिलाधिकारी के निर्देश पर पूरे जनपद में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके बावजूद ज्वालापुर क्षेत्र में नदी की भूमि पर दोबारा कब्जे की कोशिशें अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रही हैं।
वर्तमान में ज्वालापुर क्षेत्र में नवीन त्यागी लेखपाल के पद पर तैनात हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि पर फिर से अवैध कब्जा हो सकता है। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब करने और खसरा नंबर 649 को स्थायी रूप से कब्जामुक्त रखने की मांग की है।
इस संबंध में जब संबंधित लेखपाल नवीन त्यागी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं की। ऐसे में भूमि पर दोबारा कब्जे की कोशिशों और राजस्व विभाग की निगरानी को लेकर उठ रहे सवालों पर उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि पूर्व में हुई कार्रवाई के बावजूद यदि सरकारी भूमि सुरक्षित नहीं रह पा रही है तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने जिलाधिकारी से तत्काल मौके का निरीक्षण कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा भूमि पर स्थायी निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।



