नगर निगम में ‘कुंडलीमार’ व्यवस्था! लंबे समय से एक ही क्षेत्र में जमे सफाई निरीक्षकों पर उठ रहे सवाल

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में आगामी कांवड़ यात्रा और कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर नगर निगम ने कमर कसनी शुरू कर दी है। परंतु इसके साथ साथ निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। नगर निगम में तैनात एक सफाई निरीक्षक को लेकर लंबे समय से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके स्थानांतरण को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
स्थानीय लोगों और निगम से जुड़े सूत्रों का कहना है कि संबंधित सफाई निरीक्षक काफी समय से एक ही क्षेत्र में कुंडली मारकर बैठे हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि हरिद्वार से ज्वालापुर तक उनका तबादला तक नहीं किया गया, जबकि प्रशासनिक व्यवस्था में समय-समय पर अधिकारियों और कर्मचारियों का स्थानांतरण सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है।
कांवड़ यात्रा और कुंभ जैसे विशाल आयोजनों के दौरान सफाई व्यवस्था नगर निगम की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक होती है। ऐसे में अनुभवी, ईमानदार और कार्यकुशल सफाई निरीक्षकों की तैनाती अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। जानकारों का मानना है कि यदि एक ही क्षेत्र में लंबे समय तक अधिकारियों की तैनाती बनी रहती है तो पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो सकती है।
हालांकि नगर आयुक्त आईएएस नंदन कुमार की कार्यशैली और मॉनिटरिंग की नगर निगम के भीतर और बाहर सराहना की जा रही है। नंदन कुमार लगातार सफाई व्यवस्था, जनसमस्याओं और विकास कार्यों की समीक्षा कर अधिकारियों को जवाबदेह बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी सक्रिय निगरानी के चलते कई व्यवस्थाओं में सुधार भी देखने को मिला है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कांवड़ यात्रा और कुंभ मेले जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों से पहले नगर आयुक्त स्वयं सफाई व्यवस्था की समीक्षा कर लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों और अधिकारियों के संबंध में आवश्यक निर्णय लेंगे, ताकि व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सके।
नगर निगम प्रशासन को चाहिए कि कांवड़ और कुंभ से पहले सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर समीक्षा कर सफाई निरीक्षकों के तबादले किए जाएं तथा अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी जाए। इससे न केवल व्यवस्थाओं में सुधार होगा बल्कि निगम की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का भी जवाब मिल सकेगा।



