छात्रवृत्ति घोटाला: सरकार पक्ष को निचली अदालत से झटका, गॉड ब्लेस पब्लिक स्कूल के प्रबंधक को अग्रिम जमानत

हरिद्वार। हरिद्वार में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति में कथित वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी के मामले में सरकार पक्ष को निचली अदालत से झटका लगा है। 19 संदिग्ध स्कूलों और संस्थानों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में शामिल गॉड ब्लेस पब्लिक स्कूल, सहदेवपुर के प्रबंधक महार्थी पुत्र बनारसी लाल को हरिद्वार के प्रभारी सेशन जज की अदालत ने सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है।
मामला सिडकुल थाना, हरिद्वार में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 283/2026 से संबंधित है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 409 और 420 के तहत कार्रवाई दर्ज की गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार वर्ष 2021-22 और 2022-23 के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर संदिग्ध पाए गए संस्थानों की जांच के बाद 19 शिक्षण संस्थानों के खिलाफ सरकारी धन के कथित गबन और धोखाधड़ी के संबंध में मुकदमा दर्ज कराया गया।
अदालत के समक्ष बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी स्कूल में छात्रवृत्ति से संबंधित किसी तरह की वित्तीय अनियमितता नहीं हुई और स्कूल के दस्तावेजों की कोई ठोस जांच भी नहीं की गई। वहीं अभियोजन पक्ष ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए मामले को गंभीर प्रकृति का बताया।
अदालत ने केस डायरी और उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद कहा कि विवेचना अभी जारी है और मामला दस्तावेजी साक्ष्यों से संबंधित है। इस स्तर पर यह स्पष्ट नहीं है कि आरोपी द्वारा किस प्रकार वित्तीय अनियमितता अथवा धोखाधड़ी के जरिए सरकारी धन का गबन किया गया। इसके साथ ही अभियोजन की ओर से आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास भी नहीं बताया गया।
इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने महार्थी की पहली अग्रिम जमानत याचिका सशर्त स्वीकार करते हुए 75 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि के दो सक्षम जमानतदार प्रस्तुत करने पर अग्रिम जमानत देने के आदेश दिए। आरोपी को विवेचना में सहयोग करने और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस के समक्ष पूछताछ के लिए उपस्थित होने की शर्त भी लगाई गई है।
गौरतलब है कि यह आदेश मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला नहीं है। छात्रवृत्ति प्रकरण की विवेचना जारी है और अदालत ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि इस स्तर पर मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।



