हरिद्वार कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर! शैलजा के कार्यक्रम में भिड़े कांग्रेसी, गुरजीत लहरी और जितेंद्र पंवार गुर्जर के बीच मारपीट

हरिद्वार। उत्तराखंड कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी अब खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। बुधवार को प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा के कार्यक्रम के दौरान हरिद्वार में कांग्रेस के दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हो गई। मारपीट वाले नेताओं में कांग्रेस नेता गुरजीत लहरी और खानपुर विधानसभा से तैयारी में जितेंद्र पंवार हैं। जिसका का वीडियो भी सामने आया है।
गुरजीत लहरी को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और हरिद्वार ग्रामीण विधायक अनुपमा रावत का करीबी बताया जाता है, जबकि जितेंद्र पंवार को मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन का करीबी माना जाता है। घटना को लेकर दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए गए हैं। लहरी ने पंवार और उनके समर्थकों पर अभद्रता और मारपीट का आरोप लगाया, जबकि पंवार पक्ष का कहना है कि पहले लहरी ने उनके नेता को धक्का दिया।
खानपुर की सियासत ने बढ़ाई अंदरूनी खींचतान?
इस पूरे घटनाक्रम को खानपुर विधानसभा की बदलती सियासत से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हाल ही में हरीश रावत के खानपुर से विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा सामने आई है, जिसके बाद हरिद्वार की राजनीति में इस सीट को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं।
वहीं, सियासी चर्चाओं में जितेंद्र पंवार गुर्जर का नाम भी खानपुर से संभावित दावेदार के तौर पर लिया जा रहा है। ऐसे में एक तरफ रावत की खानपुर में बढ़ती सक्रियता और दूसरी तरफ पंवार की संभावित दावेदारी के बीच कांग्रेस के स्थानीय समीकरणों को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है।
यही वजह है कि कार्यक्रम में रावत के करीबी माने जाने वाले गुरजीत लहरी और काजी के करीबी माने जाने वाले जितेंद्र पंवार के बीच हुई मारपीट को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।
शैलजा के सामने ही खुल गई कांग्रेस की अंदरूनी तस्वीर
जिस कार्यक्रम का उद्देश्य पार्टी को एकजुट कर संगठनात्मक मुद्दों पर कार्यकर्ताओं को लामबंद करना था, उसी दौरान कांग्रेस नेताओं के बीच मारपीट ने पार्टी की अंदरूनी स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर ऐसे समय में जब कांग्रेस 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है और पार्टी के भीतर नेतृत्व, टिकट और विधानसभा सीटों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।
हाल के दिनों में हरीश रावत की राजनीतिक सक्रियता को लेकर कांग्रेस में पहले ही मतभेद सामने आ चुके हैं। प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने उनकी अलग से निकाली जा रही जनसंवाद यात्रा पर आपत्ति जताई थी और संगठन से समन्वय पर जोर दिया था।
अब हरिद्वार की इस मारपीट ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या खानपुर की टिकट की संभावित लड़ाई का असर कांग्रेस के स्थानीय गुटों के रिश्तों पर भी पड़ने लगा है, या यह सिर्फ कार्यक्रम के दौरान हुआ व्यक्तिगत विवाद था?
फिलहाल इसका स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है, लेकिन इतना जरूर है कि प्रदेश प्रभारी की मौजूदगी में कांग्रेसियों के बीच हुई मारपीट ने पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी को सार्वजनिक कर दिया है।



