पेसमेकर लगाने का तरीका बदला, अब दिल के अंदर लगाए जा सकते हैं छोटे वायरलेस डिवाइस

हरिद्वार: दिल की धड़कन धीमी होने या अनियमित रहने पर पेसमेकर लगाने की जरूरत पड़ सकती है। अब तक साधारण पेसमेकर लगाने के लिए छाती की त्वचा के नीचे एक छोटा पॉकेट बनाया जाता था और पतले तारों को नसों के जरिए दिल तक पहुंचाया जाता था। समय के साथ इन तारों में खराबी, टूटने या इन्फेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अब डुअल-चैंबर लीडलेस पेसमेकर इस प्रक्रिया का एक नया विकल्प है, जिसमें छाती में चीरा लगाने और दिल तक तार पहुंचाने की जरूरत नहीं होती।

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं प्रमुख डॉ. गौरव मीनोचा ने बताया, “साधारण पेसमेकर दिल की धड़कनों को नियंत्रित करने में प्रभावी रहे हैं, लेकिन उनमें इस्तेमाल होने वाले तारों से कुछ जटिलताएं हो सकती हैं। लीडलेस पेसमेकर में डिवाइस सीधे दिल के अंदर लगाया जाता है। इससे तारों से जुड़ी समस्याओं का खतरा कम करने और मरीजों को इलाज का एक अलग विकल्प देने में मदद मिलती है।”
लीडलेस पेसमेकर का आकार लगभग एक बड़े विटामिन कैप्सूल जितना होता है। इसे पैर की नस के जरिए एक पतली कैथेटर ट्यूब की मदद से दिल तक पहुंचाया जाता है। डुअल-चैंबर सिस्टम में दो छोटे डिवाइस लगाए जाते हैं। इनमें से एक दिल के ऊपरी हिस्से, यानी राइट एट्रियम, और दूसरा निचले हिस्से, यानी राइट वेंट्रिकल में लगाया जाता है।
साधारण पेसमेकर के मुकाबले इस तकनीक का एक प्रमुख अंतर यह है कि इसमें छाती की त्वचा के नीचे डिवाइस रखने के लिए पॉकेट बनाने और तारों को नसों से गुजारने की जरूरत नहीं होती। इससे छाती पर उभार या सर्जरी का निशान नहीं पड़ता और तार टूटने जैसी समस्याओं से बचने में मदद मिल सकती है। तारों से जुड़े इन्फेक्शन का जोखिम भी कम हो सकता है।
डुअल-चैंबर लीडलेस पेसमेकर उन मरीजों के लिए उपयोगी विकल्प होता है जिन्हें दिल की धड़कनों को नियंत्रित करने के लिए पेसमेकर की जरूरत होती है। लेकिन यह तकनीक सभी मरीजों के लिए सही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। मरीज की हृदय संबंधी स्थिति, उसकी जरूरतों और अन्य चिकित्सकीय पहलुओं को देखते हुए कार्डियोलॉजिस्ट तय करते हैं कि किस तरह का पेसमेकर उपयुक्त रहेगा।
अगर किसी व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट कारण के थकान, चक्कर आने या बेहोशी जैसी समस्या होती है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण दिल की धड़कनों में गड़बड़ी से जुड़े हो सकते हैं।



