देश का चर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड: 23 साल बाद शूटर संतोष राय की रिहाई का रास्ता साफ, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिए आदेश

नैनीताल। देश के चर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हत्याकांड के दोषी शूटर संतोष राय की समयपूर्व रिहाई के आदेश जारी कर दिए हैं। शुक्रवार 30 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित दस्तावेज जेल प्रशासन को प्राप्त होते ही संतोष राय की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाए। इस आदेश के बाद जेल में बंद संतोष राय के बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने की सुनवाई
उत्तराखंड हाईकोर्ट में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों की समयपूर्व रिहाई से जुड़े मामलों पर सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान अदालत ने संतोष राय समेत अन्य कैदियों के मामलों पर भी विचार किया। राज्य सरकार की ओर से अदालत में समयपूर्व रिहाई के पात्र कैदियों की नई सूची पेश की गई। सरकार ने बताया कि इस संबंध में गठित समिति की जुलाई और सितंबर में बैठकें हो चुकी हैं तथा समिति की संस्तुति के आधार पर पात्र कैदियों को चरणबद्ध तरीके से रिहा किया जा रहा है।
क्या था मधुमिता शुक्ला हत्याकांड?
9 मई 2003 को लखनऊ के पेपर मिल कॉलोनी स्थित आवास पर युवा कवयित्री मधुमिता शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के समय मधुमिता गर्भवती थीं। इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे देश में हलचल मचा दी थी। जांच में तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अमरमणि त्रिपाठी, उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी सहित कई लोगों के नाम सामने आए थे।
मामले की जांच सीबीआई ने की थी। वर्ष 2007 में देहरादून की अदालत ने अमरमणि त्रिपाठी, मधुमणि त्रिपाठी, रोहित चतुर्वेदी और संतोष राय को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में उत्तराखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी दोषसिद्धि बरकरार रखी।
पहले अमरमणि दंपती और अब शूटर की रिहाई
इस हत्याकांड में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी को अगस्त 2023 में उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश पर समयपूर्व रिहाई मिल चुकी है। वहीं, इसी मामले के एक अन्य दोषी रोहित चतुर्वेदी को 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट से समयपूर्व रिहाई का लाभ मिला था।
अब उत्तराखंड हाईकोर्ट के 30 अक्टूबर के आदेश के बाद हत्याकांड के दोषी शूटर संतोष राय की रिहाई की प्रक्रिया भी आगे बढ़ गई है। करीब 23 वर्षों से अधिक समय तक चले इस मामले में एक बार फिर समयपूर्व रिहाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।



