जनता को ज़रूरत पड़ी तो नदारद दिखे बीएलए, एसआईआर प्रक्रिया में लोगों को उठानी पड़ी परेशानी

हरिद्वार। आम जनता से घर-घर जाकर वोट की मदद माँगने वाले पार्टी एजेंट की ज़रूरत जब जनता को पड़ी तो यही बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) अपनी ज़िम्मेदारी से नदारद दिखाई पड़े, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ा।
गौरतलब है कि प्रदेशभर में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग द्वारा बीएलओ की सहायता के लिए प्रत्येक बूथ पर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीएलए नियुक्त किए गए थे। इनका कार्य आम जनता और बीएलओ के बीच समन्वय स्थापित करते हुए एसआईआर प्रक्रिया को शत-प्रतिशत सफल बनाना था। मगर जब आम जनता को इन एजेंटों की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ी तो अधिकांश स्थानों पर वे जनता की मदद के लिए आगे ही नहीं आए और पूरी प्रक्रिया उन्होंने जनता से दूरी बनाए रखी।
यदि कुछ वार्डों को छोड़ दिया जाए तो ज्वालापुर क्षेत्र के अधिकांश वार्डों में यही स्थिति देखने को मिली। एसआईआर के फॉर्म भरने के लिए लोगों को इधर-उधर चक्कर लगाने पड़े। कई लोगों को तो फॉर्म तक उपलब्ध नहीं हो सके। नतीजतन बड़ी संख्या में लोग केवल हाथ मलते रह गए। उनके फॉर्म एसआईआर में जमा होना तो दूर, कई लोगों तक फॉर्म समय पर पहुँच ही नहीं पाए।
ख़ुद को जनता का हमदर्द बताने वाले कई पैराशूट प्रत्याशी भी रहे लापता

जहाँ एक ओर बीएलए पूरी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जनता से दूरी बनाए रहे, वहीं दूसरी ओर हर चुनाव में मैदान में उतरकर ख़ुद को जनता का बड़ा हमदर्द बताने वाले कई पैराशूट प्रत्याशी भी इस पूरी प्रक्रिया में कहीं नजर नहीं आए। लोगों का आरोप है कि ऐसे नेताओं ने भी जनता की कोई सहायता नहीं की। इसे लेकर आम जनता में रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय जनता के बीच आने वाले ऐसे लोगों के इस रवैये को वे याद रखेंगे और भविष्य में इसका जवाब देंगे।



