प्रदेश में बसपा के एक मात्र मुस्लिम विधायक मोहम्मद शहज़ाद को बदनाम करने की साजिश नाकाम, भारत सरकार के निर्देश पर चल रही मदरसों की जांच
अहसान अंसारी

हरिद्वार/लक्सर। प्रदेश के सभी जनपदों में संचालित मदरसों की जांच भारत सरकार के निर्देश पर की जा रही है, लेकिन जनपद में चल रही कार्रवाई को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एक प्रतिष्ठित दैनिक अखबार में प्रकाशित खबर में यह दर्शाने की कोशिश की गई कि मदरसों की जांच बसपा विधायक Mohammad Shahzad की शिकायत पर कराई जा रही है।
इस खबर के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विधानसभा से लेकर सार्वजनिक मंचों तक मदरसों के खिलाफ चल रही कथित उत्पीड़नात्मक कार्रवाई के विरोध में खुलकर आवाज उठाने वाले विधायक मोहम्मद शहज़ाद के समर्थकों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह उनके राजनीतिक कद को नुकसान पहुंचाने की साजिश है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में जनपद के 23 मदरसों की जांच में अनियमितताओं का खुलासा होने पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। इसके बाद कुछ लोगों ने पूरे मामले को विधायक शहज़ाद से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर आरोपों की झड़ी लगा दी।
मोहम्मद शहज़ाद ने दस्तक न्यूज़ को बताया कि यह सब उन्हें बदनाम करने की सुनियोजित साजिश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मदरसों की समस्याओं को लेकर उन्होंने मदरसा संचालकों की एक बैठक समाज कल्याण मंत्री के साथ कराई थी, ताकि समस्याओं का समाधान निकल सके।
विधायक शहज़ाद ने आगे बताया कि उनके द्वारा किसी भी मदरसे की शिकायत नहीं की गई है। कुछ लोग राजनीतिक प्रोपगेंडा के तहत उनका नाम जोड़कर भ्रम फैलाने और उनकी छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।
हालांकि प्रदेशभर में मदरसों की जांच एक व्यापक सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा है, जो भारत सरकार के निर्देशों के तहत सभी जनपदों में चल रही है। ऐसे में केवल एक विधायक को इसका जिम्मेदार ठहराना राजनीतिक प्रोपेगेंडा से ज्यादा कुछ नहीं माना जा रहा। प्रदेश की राजनीति में Mohammad Shahzad एक मजबूत और बेबाक जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी अलग पहचान रखते हैं। लक्सर की जनता के बीच उनकी पकड़ और सक्रियता ही उन्हें प्रदेश में बसपा के इकलौते मुस्लिम विधायक के रूप में खास बनाती है।
विधानसभा से लेकर जनता के बीच उठने वाले मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखने वाले मोहम्मद शहज़ाद को एक जुझारू और जमीनी नेता माना जाता है। चाहे सामाजिक मुद्दे हों, अल्पसंख्यकों की आवाज हो या क्षेत्र के विकास से जुड़े सवाल—उन्होंने हमेशा मजबूती से अपनी बात रखी है।



