शीर्ष स्तर पर फेरबदल काफी नहीं, जमीनी पुलिस व्यवस्था में बदलाव ज़रूरी

हरिद्वार। उत्तराखंड में बिगड़ती कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए भले ही शासन स्तर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर फेरबदल किए जा रहे हों, लेकिन केवल शीर्ष स्तर के अधिकारियों को बदल देने से जमीनी हालात में अपेक्षित सुधार संभव नहीं है। वास्तविक चुनौती थाना और कोतवाली स्तर पर कार्यप्रणाली में परिवर्तन लाने की है। जब तक वर्षों से एक ही स्थान पर जमे दरोगा और पुलिस कर्मियों का नियमित स्थानांतरण नहीं होगा, तब तक स्थानीय स्तर पर बनी सांठगांठ, ढिलाई और प्रभाव का दायरा टूटना कठिन है।
हरिद्वार जनपद में भी कमोबेश यही स्थिति देखने को मिलती है। यहां कई थाना क्षेत्रों में लंबे समय से तैनात कर्मियों के कारण आमजन में असंतोष बढ़ रहा है। जनता को त्वरित न्याय और निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा रहती है, लेकिन यदि पुलिस तंत्र पर स्थानीय दबाव या व्यक्तिगत संबंध हावी हो जाएं तो कानून का प्रभाव कमजोर पड़ जाता है।
कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक है कि थाना स्तर व एस ओ जी में तैनाती को लेकर नियमित रोटेशन नीति लागू की जाए, कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। जबकि वर्तमान में स्थिति इतनी भाव हो चली है कि थाना व कोतवाली स्तर पर तैनात पुलिसकर्मी बहुत आयात में दशकों से एक ही थाना कोतवाली में तैनात है, जिसमें नए कप्तान को ध्यान देना होगा। क्योंकि जब शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ जमीनी ढांचे में भी सुधार होगा, तभी प्रदेश में कानून व्यवस्था वास्तव में पटरी पर लौट सकेगी।



