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दो साल बाद भी थाना प्रभारी नियुक्तियों में नहीं दिखा असर, वरिष्ठता का आदेश बना कागज़ी

देहरादून, सितम्बर 2025 – उत्तराखण्ड पुलिस मुख्यालय ने दिसम्बर 2023 में एक अहम आदेश जारी कर सभी जिलों को थाना प्रभारी नियुक्तियों में वरिष्ठता और पुलिस अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए थे। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि यह कदम पारदर्शिता लाएगा और योग्य व अनुभवी निरीक्षकों-उप निरीक्षकों को उनका हक मिलेगा। लेकिन दो साल बाद भी हालात नहीं बदले।

कागज़ पर ही सीमित आदेश

मैदान स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। कई जिलों में अब भी थाना प्रभारियों की नियुक्तियां वरिष्ठता को दरकिनार कर की जा रही हैं। सूत्रों का कहना है कि दबाव और सिफारिश अब भी नियुक्तियों का बड़ा आधार बने हुए हैं। नतीजतन कई कनिष्ठ अधिकारियों को महत्वपूर्ण थानों का प्रभारी बना दिया जाता है, जबकि वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी किनारे कर दिए जाते हैं।

अधिकारियों का मनोबल टूटा

वरिष्ठता की अनदेखी से पुलिस महकमे में असंतोष गहराता जा रहा है। कई निरीक्षकों का कहना है कि आदेश केवल कागज़ पर सिमट कर रह गया है। इससे उनका मनोबल गिरा है और कार्यकुशलता पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।

मुख्यालय मौन

मुख्यालय की ओर से हालांकि समय-समय पर पारदर्शिता बरतने की बातें दोहराई जाती रही हैं, लेकिन जिलों में लागू करने की सख्ती दिखाई नहीं देती। यही वजह है कि आदेश प्रभावी साबित नहीं हो पाया।

विशेषज्ञों की राय

पुलिस मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर नियुक्तियों में वरिष्ठता को दरकिनार करने की प्रवृत्ति जारी रही, तो यह न केवल पुलिस व्यवस्था की छवि को नुकसान पहुँचाएगा, बल्कि अपराध नियंत्रण और जनता के विश्वास पर भी असर डालेगा।

सवालों के घेरे में पुलिस व्यवस्था

अब बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यालय का आदेश भी जिलों में असरदार साबित नहीं हो रहा, तो पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित होगी। पुलिस महकमे में चर्चा है कि बिना राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के यह आदेश सिर्फ एक और कागज़ी औपचारिकता बनकर रह गया है।

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