बदमाशों की ताबड़तोड़ फायरिंग, हैवीवेट असलहों के बावजूद असमंजस में पुलिस—क्यों नहीं हुई जवाबी कार्रवाई?

हरिद्वार। लक्सर फ्लाईओवर पर दिनदहाड़े हुआ गोलीकांड अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस की कार्रवाई, उसकी तैयारी और आत्मविश्वास पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है। पुलिस अभिरक्षा में कोर्ट ले जाए जा रहे कुख्यात विनय त्यागी पर अज्ञात बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें उस अपराधी को तीन गोलियां लगीं और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। इस हमले में दो कांस्टेबल भी घायल हुए।
इस पूरे घटनाक्रम का जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, वह पुलिस के इक़बाल पर और भी गहरे सवाल खड़े करता है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि हाथ में पिस्टल लिए बदमाश पुलिसकर्मियों के सामने से भागता रहा, जबकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी अपने हेवीवेट हथियार संभालते हुए असमंजस में खड़े दिखे।
सबसे चौंकाने वाला दृश्य वह है, जब एक वीडियो में बदमाश के भागने के दौरान पुलिसकर्मी राहगीरों से उसे पकड़ने की गुहार लगाता सुनाई देता है। जवाब में वहां मौजूद लोगों की टिप्पणी—
“कौन पकड़ेगा जब तुमने गोली ही नहीं चलाई”—
पुलिस की उस क्षण की स्थिति और जनता के भरोसे की हकीकत को बयां कर देती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि
आखिर बदमाश पर जवाबी गोली क्यों नहीं चलाई गई?
क्या स्थिति को संभालने का आत्मविश्वास नहीं था?
या फिर शूटिंग ट्रेनिंग और लाइव सिचुएशन हैंडलिंग में कमी इस पूरे घटनाक्रम की वजह बनी?
यह स्वीकार करना होगा कि मौके पर पुलिस के पास हथियारों की कमी नहीं थी, लेकिन निर्णय लेने और त्वरित कार्रवाई में जो हिचक दिखाई दी, उसने अपराधियों को भागने का अवसर दे दिया। यह स्थिति ट्रेनिंग, कमांड कंट्रोल और फील्ड कॉन्फिडेंस—तीनों पर सवाल खड़े करती है।
खुफिया तंत्र का ज़िक्र भी यहां जरूरी है, क्योंकि कुख्यात अपराधी की मूवमेंट को लेकर अलर्ट लेवल और संभावित हमले की आशंका पहले से अधिक सतर्कता की मांग करती। हालांकि इस घटना में असली परीक्षा मैदान में मौजूद पुलिस बल की तत्परता और साहस की थी, जिसमें तस्वीर उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखी।
आज का यह गोलीकांड कई सवाल छोड़ गया है—
क्या पुलिसकर्मियों को लाइव फायरिंग सिचुएशन के लिए और बेहतर ट्रेनिंग की जरूरत है?
क्या आदेश और जिम्मेदारी की श्रृंखला मौके पर स्पष्ट थी?
और क्या ऐसी घटनाओं से पुलिस के प्रति जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है?
हरिद्वार पुलिस और शासन के लिए यह घटना केवल जांच का विषय नहीं, बल्कि आत्ममंथन और सुधार की चेतावनी है। क्योंकि अगर दिनदहाड़े पुलिस वैन पर हमला हो और बदमाश बेखौफ भाग जाएं, तो सवाल सिर्फ सुरक्षा का नहीं—कानून के इक़बाल का होता है।



