देहरादून का वो दिल दहला देने वाला हत्याकांड : 72 टुकड़े कर फ्रीजर में छिपाया था पत्नी का शव, प्यार से शादी फिर खून से सनी कहानी पर अब हाइकोर्ट का फैंसला

देहरादून। 2010 में देहरादून में हुए जघन्य हत्याकांड में दोषी ठहराए गए राजेश गुलाटी को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। बुधवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उसकी अपील खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।
देहरादून की निचली अदालत ने वर्ष 2017 में राजेश गुलाटी को पत्नी अनुपमा की हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही 15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इस फैसले को राजेश ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने माना ट्रायल कोर्ट का फैसला सही
करीब 8 वर्षों तक चली सुनवाई के बाद जस्टिस रविंद्र मैथानी और जस्टिस आलोक महरा की बेंच ने राजेश की अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में कोई त्रुटि नहीं है।
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लव मैरिज से शुरू हुई कहानी, , 1999 में हुई थी शादी, अमेरिका तक पहुंचा रिश्ता
सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश गुलाटी और अनुपमा की मुलाकात 1992 में एक कॉमन फ्रेंड के जरिए दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में हुई थी। सात साल के प्रेम संबंध के बाद दोनों ने 10 फरवरी 1999 को लव मैरिज की।
अमेरिका में बिगड़े हालात, भारत लौटने पर भी नहीं थमा विवाद
शादी के बाद दंपति अमेरिका शिफ्ट हो गया। लेकिन आपसी मतभेद बढ़ने लगे। अनुपमा 2003 में भारत लौट आईं, हालांकि 2005 में राजेश उन्हें फिर अमेरिका ले गया। इसी दौरान अनुपमा ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। 2008 की आर्थिक मंदी के बाद परिवार भारत लौटा।
परिवार की सलाह पर दोनों देहरादून में बस गए, लेकिन यहां भी रिश्तों में सुधार नहीं हुआ। विवाद घरेलू हिंसा और संरक्षण अधिकारी तक पहुंचा। राजेश को फटकार लगाई गई और अनुपमा को 20 हजार रुपये मासिक देने का आदेश दिया गया।
17 अक्टूबर 2010: झगड़े के बाद बेरहमी से की हत्या
17 अक्टूबर 2010 को दोनों के बीच फिर विवाद हुआ। गुस्से में राजेश ने अनुपमा की बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद उसने बाजार से इलेक्ट्रिक आरी और डीप फ्रीजर खरीदा।
दो महीने तक फ्रीजर में रखा शव, बच्चों को गुमराह किया
राजेश ने पत्नी के शव को काटकर डीप फ्रीजर में रखा। बच्चों से कहा कि उनकी मां नानी के घर गई हैं, हालांकि बच्चों को सच्चाई का आभास था।
शव के टुकड़े अलग-अलग जगह फेंकता रहा आरोपी
बच्चों को घुमाने के बहाने राजेश शव के टुकड़ों को अलग-अलग स्थानों पर फेंकता रहा, ताकि किसी को शक न हो।
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पोल खुलने से पहले भागने की तैयारी, पुलिस ने किया गिरफ्तार
भाई को हुआ शक, फर्जी पासपोर्ट कर्मचारी बनकर पहुंचा दोस्त
जब लंबे समय तक अनुपमा की अपने मायके वालों से बात नहीं हुई तो उसके भाई को शक हुआ। 11 दिसंबर को उसके दोस्त ने पासपोर्ट कर्मचारी बनकर घर जाकर जानकारी जुटाई।
12 दिसंबर को पुलिस ने दबोचा, पूछताछ में कबूला गुनाह
राजेश विदेश भागने की तैयारी कर चुका था, लेकिन 12 दिसंबर को अनुपमा का भाई पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गया। पूछताछ के दौरान राजेश ने पूरा जुर्म कबूल कर लिया।



