उत्तराखंडएक्सक्लूसिवहरिद्वार

शहर में सफाई व्यवस्था को नगर आयुक्त की टीम ने लाया पटरी पर, सभी वार्डो में शुरू हुई डोर टू डोर कूड़ा कोलेक्शन व्यवस्था

नगर आयुक्त व महापौर के मौखिक आश्वासन पर पिछले पाँच दिन से काम कर रहे सेकड़ो कर्मचारी।

(सैफ सलमानी)

हरिद्वार: शहर में पटरी से उतरी हुई सफाई व्यवस्था को नगर निगम द्वारा अपने हाथों में लिए जाने के बाद से सफाई व्यवस्था में काफी हद तक सुधार देखने को मिल रहा है साथ ही शहर की बिगड़ी हुई सफाई व्यवस्था एक बार फिर से पटरी पर आते हुए नजर आ रही है। व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नगर निगम के साथ मिलकर काम कर रहे तत्कालीन अनुबंधित कर्मचारियों द्वारा भी पुरजोर कोशिश की जा रही है। जिसके बाद से लगभग सभी वार्ड साफ नजर आने लगे है।
गौरतलब है कि पिछले 1 सप्ताह में लगभग 4 दिन डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम बंद होने के कारण आम जनता को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा है। जिसे देख नगर आयुक्त दयानंद सरस्वती द्वारा सफाई व्यवस्था को अनुबंधित संस्थानों से लेते हुए निगम को सौंप दिया गया और सफाई व्यवस्था में सुधार लाने के लिए शहर में कर्मचारियों की एक लंबी चौड़ी कोई उतारी गई। नगर आयुक्त के नेतृत्व में काम कर रही इस फौज द्वारा शहर में लगे हुए कूड़े के ढेरों को जहां मात्र कुछ ही घंटों में साफ कर दिया गया तो वहीं दूसरी ओर डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन है आम जनता के सामने आने वाली समस्या को लेकर भी लगातार कार्यवाही की जा रही है। बता देगी अनुबंधित संस्थान के अनुबंध को निरस्त किए जाने के बाद से नगर आयुक्त द्वारा कंपनी में काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों को आउट सोर्स के माध्यम से निगम के साथ रखा गया जिनके द्वारा नगर निगम की टीम के साथ मिलते हुए शहर को साफ करने का काम लगातार किया जा रहा है। नगर निगम द्वारा संभाले जाने के बाद से सफाई व्यवस्था में देखे गए सुधार के बाद से आम जनता द्वारा निगम की टीम की भूरी-भूरी प्रशंसा की जा रही है।

नगर आयुक्त के मौखिक आश्वासन पर सफाई कर्मचारी कर रहे काम

सफाई कर्मचारियों से बात करते नगर आयुक्त।

जहाँ एक ओर नगर आयुक्त दयानंद सरस्वती द्वारा उदारता का परिचय देते हुए बेरोजगार हुए सैकड़ों कर्मचारियों को आउट सोर्स के माध्यम से निगम के साथ जोड़ा गया है तो वही दूसरी ओर इन सैकड़ों कर्मचारियों के मन में इस बात का सवाल बना हुआ है कि अभी तक इन कर्मचारियों को नगर आयुक्त व महापौर की ओर से केवल मौखिक आश्वासन ही दिया गया है जबकि किसी प्रकार का कोई लिखित आदेश व जॉइनिंग लेटर जारी नही हुआ है क्या वास्तव में यह कर्मचारी व सुपरवाइजर निगम के साथ जुड़े भी हैं या नहीं।

Related Articles

error: Content is protected !!
Close